आम जनता पर फिर महंगाई की मार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल पर विपक्ष ने सरकार को घेरा!
नई दिल्ली:
देश में बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता की जेब पर एक बार फिर बड़ा बोझ पड़ा है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जिसने आम आदमी के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है। ईंधन के दामों में हुए इस नए इजाफे के बाद देश के कई प्रमुख शहरों में तेल की कीमतें एक बार फिर आसमान छूने लगी हैं।
इस बीच, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर देश में सियासत भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और नीतिगत फैसलों पर कई तीखे सवाल दागे हैं।
महंगाई की चौतरफा मार से जनता त्रस्त
लगातार बढ़ रहे दामों के कारण माल ढुलाई और परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर पड़ेगा। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले से ही रसोई गैस और सब्जियों के बढ़े दामों से लोग परेशान थे, और अब तेल की कीमतों ने उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दी हैं।
विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया
ईंधन के दामों में बढ़ोतरी होते ही मुख्य विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोला है। विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगते हुए ये प्रमुख सवाल उठाए हैं:
- टैक्स में कटौती क्यों नहीं?: विपक्ष का आरोप है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में हैं, तो सरकार देश के भीतर एक्साइज ड्यूटी और वैट (VAT) को कम करके जनता को राहत क्यों नहीं दे रही है?
- 'महंगाई मुक्त भारत' का वादा कहां गया?: विपक्षी नेताओं ने सरकार के पुराने चुनावी वादों को याद दिलाते हुए पूछा कि 'अच्छे दिन' और महंगाई कम करने के बड़े-बड़े दावों का असल सच अब जनता के सामने आ चुका है।
- आम जनता की जेब पर डाका क्यों?: विपक्ष का कहना है कि सरकार आम नागरिकों को राहत देने के बजाय तेल कंपनियों को फायदा पहुंचाने की नीति पर काम कर रही है।
आगे क्या होगा?
जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल जारी रही और सरकार ने टैक्स में कोई रियायत नहीं दी, तो आने वाले दिनों में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। फिलहाल, इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक सियासी घमासान तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
