बिहार में उच्च शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की कवायद: चार विश्वविद्यालयों में लागू होगा 'अंडर ग्रेजुएट एप्रेंटिसशिप प्रोग्राम'
पटना:
बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में अब चार साल के रेगुलर ग्रेजुएशन (स्नातक) के साथ-साथ छात्रों को एप्रेंटिसशिप (शिक्षुता ट्रेनिंग) का भी मौका मिलेगा। इस नए 'अंडर ग्रेजुएट एप्रेंटिसशिप डिग्री प्रोग्राम' (AEDP) के तहत छात्र अपनी डिग्री पूरी करने के साथ ही अपने मुख्य विषय में प्रोफेशनल अनुभव और विशेषज्ञता हासिल कर सकेंगे। यानी अब बिहार के छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक तौर पर काम सीखने का अवसर मिलेगा।
इन 4 विश्वविद्यालयों में लागू होगी नई व्यवस्था
राजभवन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को शुरुआती तौर पर बिहार की इन चार बड़ी यूनिवर्सिटियों में शुरू किया जा रहा है:
- पटना विश्वविद्यालय (Patna University)
- पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (Patliputra University)
- तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU)
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (BRABU)
राज्य के राज्यपाल सह कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने इस चार वर्षीय विशेष स्नातक प्रोग्राम के तहत 7 नए पाठ्यक्रमों (Courses) को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस संबंध में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह द्वारा आधिकारिक अधिसूचना (Notification) भी जारी कर दी गई है।
ये हैं वो 7 नए रोजगारपरक कोर्स:
नए नियम के तहत जिन सात मुख्य विषयों में एप्रेंटिसशिप के साथ डिग्री दी जाएगी, वे इस प्रकार हैं:
- बी.कॉम (वाणिज्य स्नातक): बैंकिंग वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) में विशेषज्ञता।
- बी.कॉम (वाणिज्य स्नातक): रिटेल ऑपरेशंस (खुदरा संचालन) मुख्य विषय के रूप में।
- बी.कॉम (वाणिज्य स्नातक): ई-कॉमर्स ऑपरेशंस में स्पेशलाइजेशन।
- बी.कॉम (वाणिज्य स्नातक): ह्यूमन रिसोर्स ऑपरेशंस (HR) मुख्य विषय के साथ।
- बीए (कला स्नातक): कंटेंट और क्रिएटिव राइटिंग (विषयवस्तु एवं रचनात्मक लेखन)।
- बीएससी (विज्ञान स्नातक): हेल्थकेयर मैनेजमेंट (स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन)।
- बीएससी (विज्ञान स्नातक): डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स मुख्य विषय के रूप में।
कानूनी प्रावधानों के तहत मिली मंजूरी
इस नए रोजगार-उन्मुख कोर्स को लागू करने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा पालन किया गया है। चांसलर (कुलाधिपति) ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 की धारा (2) और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 की संबंधित धाराओं [38 (4) और 39 (2)] के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस चार वर्षीय एप्रेंटिसशिप डिग्री प्रोग्राम के अध्यादेश और नियमों को अपनी सहमती दी है।
